गुरुवार, 3 जून 2010

चलिए फिर हूं आपके साथ

बहुत दिन बाद ब्लाग पर हूं। सभी शुभचिंतकों को विजयादशमी की मंगलकामनाएं। हम सभी लोकमंगल की कामना से कार्य करेंगे, ऐसी कामना करता हूं।  पिछले साल विजयादशमी के आसपास बिस्तर पर था, 20 सितंबर की  शाम वाराणसी में हुए सड़क हादसे में घायल होने की वजह से। फीमर फैक्चर के चलते आपरेशन की नौबत आई और जब चलने-फिरने लायक हुआ तो जनवरी 2013 का पहला हफ्ता गुजर चुका था। पिछले 10 महीनों के दौरान बहुत कुछ बदल चुका है। वाराणसी कार्यालय के शुभचिंतकों की बदौलत इलाहाबाद में तैनाती मिल चुकी है।  परिवार साथ है, तो सुकून भी है। बड़ा बेटा आईएचएम लखनऊ का छात्र हो गया है और किराए के मकां में हम तीन प्राणी ही बच गए हैं-पत्नी, बेटा आयुष और मैं। परिवारीजनों, मित्रों व शुभचिंतकों के बीच पिछली सितंबर से इस अक्टूबर तक तमाम नए अनुभव भी हुए हैं। फिलहाल ईश कृपा से तमाम बातें अनुकूल हैं। आगे भी हर पल वह सहाय होंगे, ऐसी आशा करता हूं।

बुधवार, 21 अप्रैल 2010

ललित मोदी को भी जाना होगा

यदि यह बात सच है कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वालों के लिए भी खुद-बखुद गड्ढा खुद जाता है तो यह मान लें कि आई पी एल कमिश्नर ललित मोदी के दिन गिने -चुने रह गए हैं और वैसे भी पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर। थरूर का गुरुर टूटा है तो जनाब ललित मोदी का भी टूटेगा। लेकिन वे याद रखे जायेंगे क्रिकेट को महंगा से महंगा बनाने के लिए।

दुनिया, राजनीति और फैसले

 सप्ताहनामा  ------------- सबसे पहले सबको गेगेरियन कैलेंडर के वर्ष 2023 की शुभकामनाएं। हर साल की तरह इस साल भी संकल्प ले रहा हूं गुडी गुडी (...