विक्रम संवत 2075 और चैत्र नवरात्र की शुभकामनाएं। मां भगवती हम सभी का कल्याण हमेशा करती रहें, यही कामना है। दो दिन पूर्व दतिया में मां पीतांबरा के दर्शन का मौका मिला। मां के दरबार में इस बार सपरिवार हाजिरी लगी। सुखद अध्यात्मिक अनुभूति हुई। शायद यही असली पूंजी है मेरी। मां पीतांबरा व धूमावती की आरती में शामिल होने पर यह जीवन सार्थक लगा। मां बार -बार बुलाएं उनके दरबार में हाजिरी लगती रहे, यही चाहूंगा अब।
इस बार दतिया प्रवास में महाराजा वीर सिंह बुंदेला के महल में भी जाने का अवसर मिला। यह विशालकाय किला उपेक्षित ही है। ज्यादातर लोग नहीं जानते इसके बारे में। बड़े बेटे शुभम ने दर्शन उपरांत विकिपीडिया पर इस किले की जानकारी देखी, फिर कहा पापा चलिए देख आते हैं। यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। वही इसकी देखभाल करता है। दोपहर में जब हम वहां पहुंचे तो गिने चुने लोग थे। ओरछा के बुंदेला शासक महाराजा वीर सिंह ने इसे वर्ष 1620 में बनवाया था। ऐसी जानकारी पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रस्तर से मिली। घर आने पर और पढ़ा तो पता चला कि केशव की किताब पढ़नी होगी, ज्यादा जानकारी के लिए। वह महाराजा वीर सिंह के दरबार में थे। अब जब मौका मिलेगा तो जरूर पढ़ना चाहूंगा, दरअसल दिलचस्पी बढ़ गई है। एक जानकारी यह मिली है कि यह किला जब बना था तब 35 लाख रुपये खर्च हुए थे। वर्तमान कीमत लगभग 35 लाख हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ही होगी, ऐसा मेरा अनुमान है। इस किले की खासियत यह है कि इसमें लोहे और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
इस बार दतिया प्रवास में महाराजा वीर सिंह बुंदेला के महल में भी जाने का अवसर मिला। यह विशालकाय किला उपेक्षित ही है। ज्यादातर लोग नहीं जानते इसके बारे में। बड़े बेटे शुभम ने दर्शन उपरांत विकिपीडिया पर इस किले की जानकारी देखी, फिर कहा पापा चलिए देख आते हैं। यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। वही इसकी देखभाल करता है। दोपहर में जब हम वहां पहुंचे तो गिने चुने लोग थे। ओरछा के बुंदेला शासक महाराजा वीर सिंह ने इसे वर्ष 1620 में बनवाया था। ऐसी जानकारी पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रस्तर से मिली। घर आने पर और पढ़ा तो पता चला कि केशव की किताब पढ़नी होगी, ज्यादा जानकारी के लिए। वह महाराजा वीर सिंह के दरबार में थे। अब जब मौका मिलेगा तो जरूर पढ़ना चाहूंगा, दरअसल दिलचस्पी बढ़ गई है। एक जानकारी यह मिली है कि यह किला जब बना था तब 35 लाख रुपये खर्च हुए थे। वर्तमान कीमत लगभग 35 लाख हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ही होगी, ऐसा मेरा अनुमान है। इस किले की खासियत यह है कि इसमें लोहे और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं हुआ है।