गंगा माई की गोद में थी इस बार रविवार की सुबह। माघ मेला क्षेत्र में लोअर संगम मार्ग पर लगे स्वामी ओइमानंद जी के शिविर में शनिवार देर रात तक जगता रहा, करीब तीन बजे नींद लगी। चार बजे खुल गई, इस अनाउंस को सुनकर कि स्नान घाट पर भीड़ न लगाएं। रात 11 बजे अचानक तय हुआ था माघ मेले क्षेत्र में जाने का प्लान। सहयोगी अवधेश पांडेय थे साथ में। दरअसल झूंसी में ही रहते हैं वह। उनके साथ पहुंच गया बाइक पर, चंद मिनटों के भीतर। ठंड थी, लेकिन अंदर ही अंदर अध्यात्मिक ऊर्जा से भरा था। सूर्योदय से पहले ही कोहरे के बीच पौष पूर्णिमा का स्नान किया। तमाम कामनाएं कीं मां गंगा से। शायद पहली बार पौष पूर्णिमा पर मां गंगा की गोद में था। इसलिए सुखद अनुभूति हुई। अकेले ही घुसा सुरसरि के शीतल जल में। सुबह जागरण कनेक्शन में भी आना था, इसलिए स्नान के बाद ज्यादा बैठकी नहीं हुई। अवधेश जी के साथ निकल पड़ा। संस्थान के कार्यक्रम के बाद थकान ऐसी लगी कि दिन में नहीं आया दफ्तर। घर में ही रजाई में दुबका रह गया। शुभम लखनऊ चले गए, अमन भी आए राबर्टसगंज से। जाते-जाते दोनों को रजाई से ही विदा किया। इस तरह अबकी रविवार अपनी राम कहानी नहीं लिख सका। अब अगले रविवार को, अगर सब कुछ सलामत रहा तो...।
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