बशीर बद्र साहब का शेर है
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।
सच है उनकी यह बात। एक एक शब्द। दरअसल जिंदगी में हर दिन सुबह और शाम की संधि आती है। अच्छे -बुरे अनुभवों के रूप में। कुछ अच्छा होता है कुछ खराब। मुझे लगता है कि हमें कुछ मांगने की जगह सिर्फ यही मांगना चाहिए वक्त से।
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।
सच है उनकी यह बात। एक एक शब्द। दरअसल जिंदगी में हर दिन सुबह और शाम की संधि आती है। अच्छे -बुरे अनुभवों के रूप में। कुछ अच्छा होता है कुछ खराब। मुझे लगता है कि हमें कुछ मांगने की जगह सिर्फ यही मांगना चाहिए वक्त से।
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